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RBI की सख्ती के चलते प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (PCA) वाले बैंक ATM का शटर बंद

एटीएम के शटर गिरने कि क्या है वजह?

पब्लिक सेक्टर बैंक RBI की प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (PCA) लिस्ट में डाले जाने की वजह से अपने एटीएम के शटर धड़ा धड़ गिरा रहे हैं। रेग्युलेटरी ऑर्डर के चलते लागत घटाने की  कोशिश में इंडियन ओवरसीज बैंक से लेकर देना बैंक जैसे कई बैंक यह कदम उठा रहे हैं। इससे इन बैंकों के प्रतिस्पर्धियों को ज्यादा Cash Withdrawal Points मुहैया कराकर मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद मिल रही है।

11 पब्लिक सेक्टर बैंक जो PCA लिस्ट में आए हैं, उनमें से सात ने अपने ATM की संख्या में खासी कमी की है। RBI के डेटा के अनुसार इनमें सेंट्रल बैंक, इलाहाबाद बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कॉरपोरेशन बैंक और यूको बैंक शामिल हैं।

ATM की संख्या में सबसे ज्यादा कटौती सितंबर 2015 में PCA में आए इंडियन ओवरसीज बैंक ने की है। बैंक ने अपने 15% ATM बंद कर दिए हैं जिससे उनकी संख्या अप्रैल 2017 के 3500 से घटकर इस साल अप्रैल में 3,000 रह गया। इस क्रम में UCO बैंक और केनरा बैंक दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं जिन्होंने अपने 7.6% ATM बंद कर दिए हैं।

RBI के डेटा के मुताबिक, PCA स्कीम के तहत उसकी निगरानी में आए बैंकों ने पिछले साल 1,635 ATM बंद किए थे। दिलचस्प बात यह है कि सरकारी बैंकों के इतने ATM बंद होने के बावजूद Cash Withdrawal 2018 में पिछले साल के मुकाबले 22% ज्यादा रहा था। Cash Withdrawal में बढ़ोतरी की वजह ग्रामीण भारत में आर्थिक गतिविधियों का तेज होना है।

दरअसल, ATM की संख्या पिछले साल के 2,07,813 से 107 बढ़कर इस साल 2,07,920 हो गई है, जिससे यह मतलब निकाला जा सकता है कि PCA वाले बैंकों ने जो ATM बंद किए हैं, उसकी दूसरे बैंकों ने भरपाई कर दी है। एसबीआई के डेप्युटी एमडी नीरज व्यास ने कहा, ‘एक ATM की कीमत लगभग ढाई लाख और उसकी ऑपरेशनल कॉस्ट 4.5-5 लाख होती है। इसके ऊपर लगभग 20 लाख रुपये का कैश जोड़ लें जिस पर कोई रिटर्न नहीं मिलता। इसके अलावा कैश मैनेजमेंट और अपने और दूसरों के नेटवर्क पर कस्टमर्स को फ्री ट्रांजैक्शन ऑफर करना होता है। इन सबके चलते ATM बिजनस खास आकर्षक नहीं है।’

बैंकिंग रेग्युलेटर ने 11 पब्लिक सेक्टर बैंकों की वित्तीय स्थिति बिगड़ने पर उन्हें PCA लिस्ट में डाल दिया है। इन बैंकों की हालत सुधारने के लिए RBI ने इनकी लैंडिंग पर कुछ बंदिशें लगा दी हैं। इसके अलावा उन्हें कॉस्ट घटाने और कई लेवल पर गैर जरूरी हायरिंग को फ्रीज करने का ऑर्डर दिया गया है। PCA वाली बंदिशों के चलते सरकारी बैंकों के मार्केट शेयर पर दबाव बना है। कमर्शियल लैंडिंग मार्केट में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी मार्च 2016 के 32 लाख करोड़ रुपये से घटकर दिसंबर 2017 में 31.1 लाख करोड़ रह गई। इस दौरान प्राइवेट बैंकों की लैंडिंग 9.1 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 10.9 लाख करोड़ रुपये जबकि NBFC का लोन पोर्टफोलियो 2.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.9 लाख करोड़ रुपये हो गया।

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