Press "Enter" to skip to content

दिग्गज निवेशक वारेन बफेट, Paytm में डाल सकते हैं 2,500 करोड़ का इन्वेस्टमेंट

फंड मिलने से Paytm की वैल्यूएशन करीब 10 से 12 करोड़ डॉलर हो जाएगी

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स और तीसरे सबसे अमीर 5.8 लाख करोड़ रुपए की दौलत के मालिक वारेन बफेट Paytm में निवेश कर सकते हैं। बफेट की कंपनी बर्कशायर हैथवे की Paytm की पैरेंट कंपनी One97 कम्युनिकेशन में हिस्सेदारी खरीदने की योजना है। ईटी के मुताबिक बर्कशायर हैथवे Paytm में 2000 से 2500 करोड़ रुपए का निवेश कर सकती है। अगर बफेट निवेश करते हैं, तो भारत में ये उनका पहला सीधा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।

One97 कम्युनिकेशन में Berkshire Hathaway की 3 से 4 फीसदी हिस्सा खरीदने के योजना है। इसके बाद कंपनी की वैल्युएशन करीब 10 से 12 करोड़ डॉलर हो जाएगी। इस बारे में पिछले हफ्ते Paytm की बोर्ड बैठक में चर्चा हुई। अब तक डील को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। निवेश का आकार अभी तय नहीं है। बर्कशायर हैथवे कम समय में Paytm के अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित है। बर्कशायर की तरफ से फंड मैनेजर टोड कॉम्ब इस पर बातचीत कर रहे हैं।

पेटीएम के इन्वेस्टर्स

Paytm में 40 से 42 फीसदी हिस्सा अलीबाबा और ANT फाइनेंशियल के पास है। वहीं 20 फीसदी हिस्सेदारी सॉफ्टबैंक विजन फंड के पास है। कंपनी के फाउंडर विजय शेखर शर्मा के पास Paytm का 16 फीसदी हिस्सा है। वहीं SAIF पार्टनर्स के पास 20 से 22 फीसदी हिस्सा है। एक तरह से Paytm पूरी तरह विदेशी कंपनी बन चुकी है।

Paytm ने अब तक 14 हजार करोड़ रुपए जुटाए हैं। भारत में 200 अरब डॉलर के डिजिटल पेमेंट होते हैं। वित्त वर्ष 2018 में इसमें मोबाइल पेमेंट की हिस्सेदारी सिर्फ 10 अरब डॉलर की है। वित्त वर्ष 2023 तक ये बाजार करीब 1 लाख करोड़ डॉलर का हो जाएगा। भारत के बढ़ते डिजिटल पेमेंट के बाजार पर ही वारेन बफेट पैसा लगा रहे हैं। वो आसानी से किसी कंपनी में निवेश नहीं करते हैं। Paytm का दावा है कि उन्होंने 4 अरब डॉलर का मंथली ग्रास ट्रांसजैक्शन वेल्यू को छू लिया है। जून में समाप्त क्वार्टर में ट्रांसजैक्शन की संख्या 1.3 करोड़ पर पहुंच गई है।

भारत में बजाज आयलांज के साथ की थी पार्टनरशिप

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वारेन बफेट ने साल 2011 में बर्कशायर इंडिया को बनाया था और इंश्योरेंस बेचने के लिए बजाज आयलांज के साथ पार्टनरशिप की थी। हालांकि, दो साल बाद ही Berkshire इस पार्टनरशिप से बाहर हो गई। कंपनी का कहना था कि ज्यादा रेग्युलेशन की वजह से वह बाहर निकल रही है।


यदि आपके मन में इस Blog Post के सम्बंधित कोई भी प्रश्न है तो कृपया नीचे Comment ज़रुर करें।

कृपया हमारे Blog Post के प्रति अपनी ख़ुशी दर्शाने के लिए इसे Facebook, Twitter, Google+ और Linkedin इत्यादि Social Network पर शेयर कीजिए।

ऐसे ही और Informational Posts पढ़ते रहने के लिए और नए Blog Posts के बारे में Notifications प्राप्त करने के लिए आज ही हमें Subscribe कीजिए।

More from NewsMore posts in News »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.